आयुर्वेदिक अभ्यंग मतलब, फायदे और विधि Abhyanga massage benefits in hindi

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आयुर्वेद में अभ्यंग के अनेकों फायदे बताये गए है और oddstree के इस लेख आयुर्वेदिक अभ्यंग मतलब, फायदे और विधि Abhyanga massage benefits in hindi में हम निम्नलिखित प्रश्नो के सम्पूर्ण उत्तर आपको देंगे।

अभ्यंग क्या है ? what is abhyanga massage?

अभ्यंग कैसे किया जाता है ? how to do abhyanga massage?

अभ्यंग के क्या लाभ हैं ? benefits of abhyanga massage in hindi?

अभ्यंग का हिंदी अर्थ है ‘मालिश’ शरीर की ऊर्जा, मन का संतुलन एक स्वस्थ व्यक्ति की पहचान है। अभ्यंग या मालिश प्रतिदिन करना काफी आवश्यक होता है। जिससे हमारा शारीरिक और मानसिक स्वाथ्य ठीक रहता है।

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अभ्यंग या मालिश किसके लिए आवश्यक है ? Why abhyanga is important in Hindi

मालिश या अभ्यंग हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है चाहे वो रोगी हो या स्वस्थ। यदि स्वस्थ मनुष्य स्व-अभ्यंग करता रहे तो रोग की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होगी।

अभ्यंग के लाभ Abhyanga massage benefits in hindi

  1. अभ्यंग abhyang से शरीर में रक्त प्रवाह में सुधार आता है।
  2. त्वचा नरम या मुलायम बनती है। रूखेपन की समस्या में निजात मिलता है।
  3. अभ्यंग वाट को नियंत्रित करता है। जोड़ो एवं मांसपेशियों की अकड़न समाप्त होती है।
  4. पाचन से जुडी समस्याओं में अभ्यंग या मालिश कमाल का असर डालती है।
  5. Abhyang शरीर की अशुद्धियों को दूर कर पाचन दुरुस्त करने में मदद करता है।
  6. यदि आपका पाचन दुरुस्त हो तो शरीर की अधिक से अधिक बिमारियों से बचा जा सकता है।
  7. त्वचा कांतिमय तथा चमकदार हो जाती है।
  8. शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
  9. मन और तन की ऊर्जा के बीच संतुलन बना रहता है।

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आयुर्वेदिक मसाज अभ्यंग के फायदे what are the benefits of ayurvedic massage

  1. त्वचा में निखार लाता है।
  2. थकावट दूर करने में सहायक
  3. वात संतुलनकारी
  4. मांसपेशियों के विकास में सहायक होता है।
  5. नींद अच्छी आती है।
  6. समय से आने से रोकता है।
  7. आँखों की रौशनी बढ़ता है।
  8. आयु बढ़ने वाला होता है।
  9. निरोगी बनता है।
  10. शरीर को पुष्ट रखता है।
  11. किसी प्रकार का आघात सहने की क्षमता प्रदान करता है।

अभ्यंग के लिए प्रकृति अनुसार करें तैलम का चुनाव list of ayurvedic oils for Abhyanga in Hindi

अभ्यंग के लिए प्रकृति अनुसार करें तैलम का चुनाव list of ayurvedic oils for Abhyanga in Hindi

वात प्रकृति के लिए abhyanga oil for vata in Hindi

वात प्रकृति वाले लोगों को तिल के तेल से मालिश करनी चाहिए। आप चाहें तो धन्वन्तराम तेल, दशमूल तेल, बल या महानारायण तैलम (तेल) abhyanga massage oil का प्रयोग कर सकते हैं।

पित्त प्रकृति के लिए abhyanga oil for pitta in Hindi

नारियल, सूरजमुखी, चन्दन, या जातादि इत्यादि तैल का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि पित्त प्रकृति के लोगों की त्वचा तैलीय और गर्म प्रकृति की होती है। अतः इनके लिए शीतल तैल अधिक उपयोगी है।

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कफ प्रकृति प्रधान लोगों के लिए तैल abhyanga oil for kaf in Hindi

कफ प्रकृति के लोगों को ठंडी तैलीय प्रकृति के होने के कारण सरसों या तिल के तेल का चुनाव करना चाहिए। कफ असंतुलन की स्थिति में आयुर्वेदिक दशमूल का तेल उपयोग किया जा सकता है।

अभ्यंग/मालिश कब नहीं करना चाहिए Abhyanga massage side effects

खांसी, बुखार, मासिक धर्म, अपच या संक्रमण में अभ्यंग या मालिश नहीं करनी चाहिए। खाने के तुरंत बाद, वमन या विरेचन, नस्य या वस्ति आदि के बाद अभ्यंग करना वर्जित है।

अभ्यंग/मालिश किस प्रकार करें abhyanga massage procedure in Hindi

अभ्यंग की विधि – सर्वप्रथम सर फिर चेहरा आँखें, गाल, नथुने, ठुड्डी, कनपट्टी, कान, छाती, पेट, कंधे, हाँथ, पीठ, टाँगे, पंजे, एड़ी -इस क्रम में अभ्यंग करें।

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अभ्यंग स्नान करने की विधि Abhyang snan kya hota hai

आयुर्वेदि अभ्यंग करने के कम से कम 20 मिनट बाद उबटन कर स्नान करना चाहिए। इसके लिए सर्वप्रथम तिल के तेल से मसाज की जाती है फिर स्नान किया जाता है।

पादाभ्यंग क्या है ? padabhyanga benefits in hindi

इस प्रकार अभ्यंग /मालिश करना काफी प्रभावकारी माना जाता है। आयुर्वेद में अभ्यंग का एक महत्वपूर्ण स्थान है।Abhyanga massage benefits hindi इस लेख से आपको अभ्यंग की पूरी जानकारी मिल गयी होगी इसी। इसी प्रकार पादाभ्यंग जिसे आप Foot massage या पैरों की मालिश कह सकते हैं।

यूँ तो सम्पूर्ण शरीर का अभ्यंग बहुत आवश्यक है परन्तु यदि आपके पास समय का आभाव हो तो आप पदाभ्यांग करके भी अभ्यंग के सभी फायदे ले सकते हैं।

पादाभ्यंग का यदि संधि विच्छेद करें तो यह पादा(Foot) + अभ्यंग(Massage) होता है।

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पादाभ्यंग थेरेपी -सभी रोगों का इलाज करने के लिए…

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