पादाभ्यंग थेरेपी – सभी रोगों का एक इलाज padabhyanga benefits in hindi

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padabhyanga benefits in hindi पादाभ्यांग थेरिपी एक ऐसी चमत्कारी विधि है जिसके द्वारा शरीर के सभी रोगों का इलाज संभव है। पर पादाभ्यांग को समझने के पहले हमें अभ्यंग शब्द का अर्थ समझ लेना चाहिए।

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आयुर्वेद में पैरों का बहुत अधिक महत्व होता है। पैर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होते हैं। क्यों की सभी नसों का END POINT पैरों में होता है। पैरों की मसाज मात्र से आप सम्पूर्ण स्वास्थ लाभ ले सकते हैं।

पैरों की मालिश क्यूँ जरुरी है ? padabhyanga foot massage benefits in hindi

आयुर्वेद पैरों को मोटर अंग मानता है।लगभग सभी अंगों के संपर्क तंत्र की समाप्ति का स्थान पैरों में ही होता है। जिससे सभी तंत्रिकाओं को मज़बूत करने में मदद मिलती है। स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है।

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पादाभ्यंग कब करें padabhyanga procedure and timing in hindi

आप पादाभ्यंग करने का सही समय निर्धारित करना चाहते हैं तो आप रात को बिस्तर पर जाने के पहले का समय निर्धारित कर सकते हैं। क्योंकि इस समय आप दैनिक दिनचर्या से फुर्सत पा लेते हैं तथा पूरे दिन के कामों से थक भी जाते हैं तो यह सबसे बेहतर चुनाव है।

आयुर्वेद पादाभ्यंग को वैकल्पिक उपचारों की जननी मानता है। पादाभ्यंग के द्वारा सभी प्रकार के वात, पित्त, और कफ दोषों या असंतुलन को दूर किया जा सकता है।

पादाभ्यंग घर पर कैसे करें padabhyanga therapy at home in hindi

यूँ तो दोष असंतुलन की स्थिति में किसी योग्य चिकित्सक से रोग की जांच करवा कर पादाभ्यंग करवाना चाहिए। परन्तु यदि आप इसे स्वयं भी घर से कर सकते हैं। इसके लिए पादाभ्यंग किट की जरुरत पड़ती है।

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पादाभ्यंग किट padabhyanga kit

घर पर पादाभ्यंग करने के लिए आपको जिन सामग्रियों की आवश्यकता पड़ने वाली है वो निम्नलिखित है।

  1. तैलम (तेल) padabhyanga oil
  2. पैरों के नीचे बिछाने की प्लास्टिक plastic sheet
  3. कपडा या पुराना तौलिया old towel
  4. जुराबें या सिलिकॉन के जूते socks
  5. यदि संभव हो तो एक कांसे की कटोरी kansa vatki bowl

पादाभ्यंग करने की विधि padabhyanga procedure

पादाभ्यंग लाभ लेने वाले व्यक्ति को सीधा लिटाएं। पैरों के नीचे प्लास्टिक शीट बिछा कर प्रकृति अनुसार तैलम का चुनाव करें।

वात प्रकृति के रोगी के लिए तिल का तैल, कफ प्रकृति के रोगी के लिए नारियल, सूरजमुखी या चन्दन का तेल और कफ प्रकृति के लिए सरसों का तेल उपयुक्त रहता है।

अब तेल को हल्का गुनगुना करके पैरों पर छोड़ें। अब पैरों, टखने, जोड़ों और तलवे पर अच्छी तरह से हलके हाथों से दबाते हुए मालिश करें। कम से कम 20 मिनट तक मालिश की जा सकती है। जिसमे शुरूआती 10 मिनट हाथों से फिर 10 मिनट कटोरी के निचले हिस्से से तलवों पर रगड़ कर घर्षण करें।

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इस प्रक्रिया में आपके रोगानुसार आपके पैरों का रंग गहरा पड़ जाता है। कभी-कभी यह काला भी हो जाता है। इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है। पैरों का रंग बदलना इस बात का प्रतिक है की यह आपका रोग समाप्त कर रहा है। आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बहार निकल रहे हैं।

पादाभ्यंग के फायदे/लाभ padabhyanga benefits in hindi

  1. फटी एड़ियों को भर कर चिकना बनता है।
  2. थकान उतारने में सहायक
  3. आँखों की रौशनी बढ़ता है।
  4. हाथ पैरों में सुन्न होने की समस्या को दूर करता है।
  5. त्वचा को कांतिमय(ग्लोइंग) बनता है।
  6. मानसिक बिमारियों से बचने में मददगार
  7. नींद न आने की समस्या में सुधार लाता है
  8. स्ट्रेस, एंजाइटी, सिरदर्द, हाइपर टेंशन जैसी बिमारियों से बचाता है
  9. ब्लड सर्क्युलेशन बढ़ता है
  10. जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों की अकड़न में सुधार लाता है
  11. डिप्रेशन या मानसिक/शारीरिक असंतुलन को दूर करने में सहायक
  12. श्रवण क्षमता तथा नेत्र ज्योति में सहायक
  13. साइटिका के दर्द में आराम दिलाता है।

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कांसे की कटोरी से पादाभ्यंग करने के लाभ Kansa bowl foot massage benefits in Hindi

पादाभ्यंग थेरेपी कांसे की कटोरी द्वारा करने को हम कांसा वटकी आयुर्वेदिक फुट मसाज kansa vatki ayurvedic foot massage कहते हैं।

  • कांसे की कटोरी से पादाभ्यंग करने से पैरों को आराम मिलता है।
  • रक्त संचार में सहायक
  • जोड़ों के दर्द में आराम दिलाती है
  • अनिंद्रा तथा थकान मिटने में सहायक
  • आतंरिक अंगों को विषमुक्त या डेटॉक्स करने में सहायक
  • एंजाइटी, थकान, और डिप्रेशन समाप्त कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है।
  • खोई हुई ऊर्जा वापस लाने में सहायक

कांसा वटकी पैरों की आयुर्वेदिक मालिश Kansa vatki foot massage machine

कांसा वटकी मसाज के लिए ऑनलाइन मशीन padabhyanga machine/kansya foot massager भी ली जा सकती है। यदि आप हांथों से मसाज नहीं करना चाहते।

पादाभ्यंग कब नहीं करना चाहिए/पादाभ्यंग के नुकसान padabhyanga side effects in hindi

स्वास्थ सम्बन्धी कुछ विशेष परिस्थितियों में पादाभ्यंग नहीं करना चाहिए जैसे – सर्दी, बुखार, ब्लड इन्फेक्शन, अपच, पेट की बिमारी, या फिर त्वचा विकार में पादाभ्यंग नहीं करना चाहिए।

पादाभ्यंग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें padabhyanga ayurvedic foot massage

  • अच्छे स्वस्थ के लिए रोज़ करें पादाभ्यंग
  • पादाभ्यंग हमेशा खाने के 1-2 घंटे बाद ही करना चाहिए
  • अभ्यंग स्नान पूर्व ही करें
  • अधिक भूख या प्यास लगने पर अभ्यंग न करें
  • अभ्यंग करने के 20 मिनट बाद ही स्नान करें
  • गुनगुने जल से ही स्नान करें

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