टेरारियम क्या होता है और कैसे बनाते हैं how to make terrarium in Hindi

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बहुमंजिली आवास योजना ने मनुष्य के प्रकृति प्रेम और बागवानी के शौक को ताक पर रख दिया है। इसी बात को ध्यान में रखकर और आपके प्रकृति प्रेम को देखते हये आपके समक्ष प्रस्तुत है टैरेरियम बनाने की विधि। terrarium in Hindi टैरेरियम का अर्थ है “कांच के पात्रों में पौधे उगाना”।

टेरारियम का इतिहास terrarium history in Hindi

आज से लगभग 160 वर्ष पूर्व डा. नैथानियल वार्ड ने क्राईसेलिस नामक पौधे के बीज कांच के बन्द बर्तन में मिट्टी डालकर, आवश्यक मात्रा में नमी देकर बो दिये और पौधे के उगने की विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन करने लगे। कछ ही दिनों के पश्चात् बीजों से पौधे उग गये।

डा. वार्ड की धारणा थी कि इस घटे वातावरण में ये पौधे शीघ्र ही मर जायेंगे। लेकिन उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब पौधे बिना किसी विशेष देख-रेख के, निरंतर चार वर्षों तक भली प्रकार वृद्धि करते रहे।

इससे उन्हें अन्य पौधों को भी कांच के बन्द बर्तन में उगाने की धुन लग गई। उन्होंने पाया कि उष्णकटिबन्धीय पौधे (ट्रापिकल फोलिएज) विशेष रूप से फर्न, इस प्रकार से उगाने के लिये सर्वथा उपयक्त हैं।

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टैरेरियम का सिद्धान्त क्या है How do terrariums work in hindi

टैरेरियम का सिद्धान्त है कांच के बन्द बर्तन में डाली गई मिटटी में एक बार दिया गया पानी पौधों की जड़ द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जो पौधों के वायुवीय अंगों से उत्स्वेदन क्रिया में उत्सर्जित होकर वाष्प के रूप में कांच के बर्तन की दीवारों पर जमा हो जाता है।

यह वाष्प ठण्डी होकर पानी के रूप में बदल कर पुनः मिट्टी में मिल जाती है। इससे पौधे को कांच के बर्तन में अन्दर ही एक सन्तुलित वातावरण मिल जाता है। यदि टैरेरियम को सील कर दिया जाये तो देखभाल की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है।

टेरारियम के फायदे/उपयोगिता क्या हैं ? Terrarium benefits in hindi

टेरारियम क्या होता है और कैसे बनाते हैं how to make terrarium in Hindi

उष्ण कटिबंधीय पौधों को गर्म तथा आर्द्र जलवाय की आवश्यकता पड़ती है। उन शहरों में जहां गर्मी अधिक पडती है घरों को हरियाली से अलंकृत करने के लिये यह सबसे आसान, नया तथा सस्ता उपाय है।

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ये अत्यन्त ही आकर्षक तथा मोह लेने वाले लगते हैं। इतना ही नहीं इस प्रकार के छोटे-छोटे टैरेरियम बनाकर उपहारस्वरूप भेंट में भी दिये जा सकते हैं या बाजार में बेच कर आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है।

 वनस्पतिविज्ञान पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक स्वयं समर्थित छोटा सा ईकोसिस्टम‘ बना लेना कितना दिलचस्प रहेगा। इस ईकोसिस्टम में पौधों के अलावा कीट पतंगों, जमीन में रहने वाले जीवों जैसे केचओं आदि को भी शामिल कर सकते हैं। परन्तु इनकी संख्या शीघ्र ही बढ़ जाती है।

टेरारियम कैसे बनायें ? how to make terrarium at home in hindi

पारदर्शी गोल या चौकोर, एक छोटे छेद वाला पात्र, जिसका अंदर का व्यास कम से कम 5 सेंमी. हो, एक छोटे से टैरेरियम की शक्ल में बदला जा सकता है। इसके बाद बड़े पात्रों की कोई सीमा नहीं है। पात्र कांच या उत्तम पारदर्शी प्लास्टिक किसी का भी हो सकता है। लेकिन प्लास्टिक, मिट्टी तथा अम्लों को सह नहीं पाता और शीघ्र ही वह अपारदर्शी होने लगता है। अतः कांच का पात्र ही उपयक्त होता है। लेकिन हरे कांच के बर्तन में टैरेरियम न बनायें।

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बर्तन को प्रयोग में लाने से पर्व गर्म पानी व साबन से धोकर साफ कर लें। बर्तन कहीं से चटका न हो अन्यथा उसमें से सारा पानी रिस सकता है। बेलजार या बड़े कैन्डी जार फर्न आदि को उगाने के लिये अति उपयुक्त हैं। मछली पालने वाले टैंक, चौड़े मुंह के जार, घड़ेनमा जार या कलश, प्रयोगशालाओं में काम आने वाले बीकर या टब आदि से उत्कृष्ट टैरेरियम बनाया जा सकता है।

परंपरागत टैरेरियम how to make terrarium plants at home in Hindi

पहले टैरेरियम के अंदर साधारण मिट्टी तथा पत्तियों की खाद मिलाकर भरते थे। इस मिटटी में सीधे ही छोटे फर्न, मौस. लाईकेन या क्लब मौस आदि लगा दी जाती थी ताकि हरितिमा परे वर्ष बनी रहे। आधनिक टैरेरियम में पानी के निकास की आवश्यकता नहीं पड़ती। पात्र के अन्दर मिट्टी के स्थान पर कोई वृद्धिकारक मिश्रण का उपयोग किया जाता है।

वृद्धिकारक मिश्रण (ग्रोइंग मिक्सचर) में हवा का संचरण अच्छा होने के कारण इसे अधिक उपयुक्त माना गया है और लगभग सभी पौधे इसमें अच्छे पनपते हैं। इसमें अधिक पानी के निकास की व्यवस्था भी नहीं करनी पडती साथ ही किसी पौधे को उखाडना पड़े तो पौधा बिना किसी अन्य पौधे को नुकसान पहुंचाये आसानी से

खिच आता है। यदि पुष्पित पौधे लगे हों तो इसके उपयोग से फूलों में अधिक चटकीले रंग आते हैं।

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टेरारियम बनाने के लिए आवश्यक सामग्री things for making terrarium in Hindi

  • बोतल साफ करने का ब्रश
  • चौड़े मुंह की कीप और पात्र के अन्दर जा सकने वाली खोखली प्लास्टिक या कागज की नली
  • बांस की लम्बी व पतली खपच्चियों से बनायी गयी चिमटी,
  • मिट्टी दबाने के लिये एक पतली डंडी के सिरे पर आवश्यक मोटाई का लकड़ी का गुटका,
  • बांस की खपच्ची के एक सिरे पर ब्लेड बांधकर तैयार लंबा चाक तथा मोटे तार के नीचे सिरे के छल्ले को मोड़कर पौधा उखाडने के लिये उपाय
  • आवश्यक खुदाई के लिये एक लम्बी डंडी के एक सिरे पर टूटी चम्मच का चपटा वाला सिरा बांध लें

टेरारियम बनाने विधि process for making a terrarium in Hindi

टेरारियम क्या होता है और कैसे बनाते हैं how to make terrarium in Hindi

मिट्टी आदि की सतहें सर्वप्रथम बर्तन में डालने के लिये मिट्टी के मिश्रण को तैयार करें। बाजार में मिलने वाला मिश्रण (सॉयल मिक्स) अपेक्षाकत अच्छा रहता है।

अगर बाजार में यह उपलब्ध न हो तो बगीचे की मिट्टी (गार्डन सॉयल) जिसमें पत्तियों की खाद मिली हो ले लें। इस मिट्टी में 2:1 के अनुपात से मोटा रेत भी मिला लें। इस मिश्रण को कीटाणुरहित बनाने के लिये 150° सै. पर लगभग एक घंटे तक गर्म करें।

बर्तन के अन्दर पानी का निकास बनाये रखने के लिये बर्तन की तली में पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े लगभग 2-3 सेंमी. की मोटाई तक भरें। इसके ऊपर थोड़ा सा चारकोल का पाऊडर डालें जिससे कि आर्द्र अवस्था में पौधों से सड़े हुये भागों से निकलने वाली गैसों को निष्क्रिय किया जा सके।

अब इसके ऊपर पीट मौस की पतली सी सतह बिछा दें। मिट्टी के मिश्रण को लगभग 2/3 भाग (कल मोटाई का) की ऊंचाई तक भरें परन्तु यह ऊंचाई बर्तन की ऊंचाई के अनुसार होनी चाहिये कि हाथ में उठाने पर गोला बना जाये तथा जमीन पर डालने से मिट्टी भुरभुरा कर फैल जाये।

टेरारियम के लिए उपयुक्त पौधे plants suitable for terrarium in india in hindi

मध्यम ऊंचाई के पौधे,लम्बे पौधे-मीन हेयर फर्न, बर्ड नैस्ट फर्न, एस्पैरेगस आदि। क्रोटोन, गोल्ड डस्ट, पीलिया मस्कोसा, पेप्रोमिया, स्पाइडर प्लांट, बिगोनिया रेक्स, फिटोनिया, क्लोरोफ्टिम, ड्रेसिना तथा मारेन्टा आदि। सतह ढकने के लिये – बेबीज टीयर्स, वाइन्डरिंग ये, मौस, मौस फर्न आदि।

समायोजन

टेरारियमकैसे बनाते हैं

जिन पौधों को आप लगाना चाहते हैं उनमें आपस में मिलकर अच्छी तरह वृद्धि करने की क्षमता होनी चाहिये। पौधों की पत्तियों के विभिन्न आकार, रंगों तथा ऊंचाई के अनुसार एक अत्यंत ही आकर्षक समायोजना तैयार की जा सकती है। इसलिये पौधों का स्थान निर्धारित करते समय विशेष सावधानी रखें।

पौधों के लगाने की समायोजना पहले कागज पर तैयार करें। और उसी के अनुसार लगायें। बर्तन के अन्दर की जगह को अधिकतम उपयोग में लाया जा सके इसके लिये मिट्टी की सतह को सीढ़ीनुमा (टैरेस टाईप) शक्ल दें।

स्थान को ध्यान में रखते हुये ही पौधों की संख्या निर्धारित करें। टैरेरियम में ज्यादा घने या पास-पास पौधे न लगायें और न ही पौधों की पत्तियां बर्तन की दीवार को छुएं।


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पौधे लगाना

पौधों का स्थान निर्धारित करके स्वस्थ पौधे का चुनाव करें। उसमें से सड़ी, गली व पीली पत्तियां, तने के भाग तथा जड़ आदि निकाल दें। पौधा छोटी से छोटी अवस्था का ही लें। अब पौधे को मिट्टी समेत गमले से बाहर निकाल कर उसकी जड़ों के पास से फालतू मिट्टी को हटा दें तथा कम से कम मिट्टी रखें।

कम चौड़े मुंह वाले बर्तन में पौधा लगाने के लिये पौधे की जड़ से मिट्टी बिल्कुल ही झाड़ दें। अब बर्तन की मिट्टी में आवश्यकतानुसार गड्ढा करें तथा पौधे को सावधानी से लगाकर उसकी जड़ों के पास की मिट्टी दबा दें। इस प्रकार समायोजनानुसार सभी पौधे लगा दें।

तदोपरान्त स्प्रेयर से पानी छिड़क कर व ढक कर इसे 2-3 दिनों के लिये छायादार स्थान में रखें। इसके बाद जब पौधे पनपने लगें तो कहीं भी रख सकते ।

टेरेरियम बनाने में सावधानियां

टेरारियम क्या होता है

कांच के बर्तन या बोतल में लगाया गया यह आकर्षक बाग भी आपकी उचित देखभाल का आभारी होगा। यदि बर्तन भली प्रकार सील कर दिया गया है तो ध्यान रखें कि बर्तन के अन्दर आर्द्रता अधिक नहीं होनी चाहिये। इसलिये इसे सील करने से पहले देखें कि बर्तन की अन्दर की दीवार पर आवश्यकता से अधिक पानी (बंदों के रूप में) की सतह तो नहीं बन रही है। यदि ऐसा हो तो ढक्कन खोलकर थोड़ी आर्द्रता कम कर दें।

अगर ज्यादा सूखापन दिखायी दे तो पानी स्प्रे कर दें। कभी भी ताजा पानी न दें। 2-3 दिनों का रखा पानी ही प्रयोग में लायें। तदोपरान्त भली प्रकार सील करें। अगर इसमें थोड़ी सी भी गलती रह गई तो सील होने के बाद कुछ ही दिनों में पौधे मरने शुरू हो जायेंगे। अच्छी प्रकार से समायोजित इस बाग की वर्षों तक कम ही देखभाल करनी पड़ती है।

इसको सीधी तेज धूप या ठण्ड में भी न रखें। वैसे इसके लिये उचित तापक्रम 18-32° सें. है। तेज परावर्तित प्रकाश इसके लिये सर्वोत्तम होगा।

आरंभ में यदि कछ पौधे मरते हैं या उनकी पत्तियां सड़ती-गलती हैं तो उन्हें समय-समय पर निकालते रहें।

पत्तियों में पीलापन पानी की अधिकता को बताता है। इसे कम करने के लिये मिट्टी में थोडा सा रेत और मिला दें। अगर पौधों की बढ़वार कम हो रही है तो पौधों को आवश्यकतानुसार खाद आदि दें। सर्दियों के मौसम में, माह में दो बार 1 प्रतिशत यूरिया का घोल मिट्टी में डालें। साथ ही यदि कीड़े भी दिखायी दें तो 1 प्रतिशत मैलाथियान दवाई का स्प्रे कर दें।

टेरेनियम के लये उपयुक्त प्रकाश

सूर्य के प्रकाश की व्यवस्था न होने पर 40 वाट की दो फ्लोरेसेंट ट्यूब लगभग 10 सेमी. की दूरी पर जलायें। अगर पौधे फल देने वाले हैं तो इस कत्रिम प्रकाश में भी उसी प्रकार की रंग-बिरंगी छटा बिखरेगी जैसे किसी उद्यान में फूलों के खिलने पर बिखरती है। 

चाहें तो आप टैरेरियम के अन्य उपकरणों के सहयोग से एक छोटा सा हरितगृह (ग्रीन हाऊस) का रूप भी दे सकते हैं जिसमें कृत्रिम रूप से हवा, नमी तथा रोशनी प्रदान की जा रही हो। इसको और अधिक आकर्षक बनाने के लिये आप जगह की उपलब्धि के अनुसार इसमें किसी भी धातु या प्लास्टिक आदि के जानवरों, पुलों, नावों, मकानों, पहाड़ों आदि के माडल रख सकते हैं।

खिलौनों या माडलों का आकार बर्तन के मह की चौड़ाई पर निर्भर करेगा। यह अब आप पर निर्भर करता है कि कब आप टैरेरियम बनाकर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, सहेलियों को अपने व्यक्तित्व का कमाल दिखाते हैं।

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